स्त्री शिक्षा के निहितार्थ: एक समाजशास्त्रीय मूल्यांकन

प्रशान्त कुमार सिंह

Abstract


भारत के इतिहास में महिलाओं की परिस्थिति उच्च और निम्न परिस्थिति के बीच में संघर्षरत रही है।
समाज सुधारकों के हस्तक्षेप से महिलाओं की चेतना जागृत हुई। भारतीय लोकतन्त्र में सांविधानिक
रूप से सशति प्राप्त करने के पश्चात् महिलाओं में अपूर्व शक्ति उत्पन्न हुई। आज के परिवेश में भारतीय
शक्ति जिसे हम स्त्री या नारी के रूप में जानते हैं, अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति अधिक
प्रयत्नशील और चिन्तनशील है। आज अपने प्रति हो रहे शोषण के प्रति भी आवाज उठाने में जरा भी
नहीं झिझक रही हैं, इन सब के पीछे कहीं न कहीं शिक्षा का योगदान है। शिक्षा ही वह अस्त्र है जो
महिलाओं को उच्च पायदान पर लाने में अपने मुख्य योगदान प्रदान किया है।

Keywords


संरक्षण, अवबोधन, शैथिल्य, आन्दोलन, शिक्षण, निवर्हन, उपनिवेशवाद।

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DOI: https://doi.org/10.29320/jnpgvr.v10i01.11054

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