हिन्दू महिलाओं में धर्म

दीपेन्द्र मोहन सिंह

Abstract


भारतीय समाज में धर्म की परम्परा अनादिकाल से चली आ रही है। भारतीय सामाजिक व्यवस्था में
धर्म का महत्त्वपूर्ण योगदान है। यह स्वीकार किया जाता है कि धर्म से जीवन के विविध पक्ष गतिशील
होते हैं। धर्म की अवधारणा भारतीय चिन्तन की सर्वाधिक महत्वपूर्ण अवधारणा है। आमतौर पर यह
मान्यता रही है कि हिन्दू महिलाएँ धर्म के प्रति आस्था और विश्वास करने वाली हैं। पुरुषों की अपेक्षा
उनमें धर्म परायणता का भाव अधिक होता है। नगरीय चकाचैंध के बावजूद हिन्दू महिलाएँ परम्परावादी
और धार्मिक आस्थामूलक होती हैं। आज के बदलते परिवेश में धार्मिक मान्यताओं, परम्पराओं एवं
प्रथाओं में थोड़ा उतार चढ़ाव अवश्य देखने को मिलता है, फिर भी महिलाओं में धर्म के प्रति अधिक
निष्ठा एवं दृढ़ता दिखाई पड़ती है। समाज में तमाम बन्धनों एवं बाध्यताओं के बावजूद भी वह समाज
के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति किसी न किसी माध्यम से अवश्य दर्ज कराती रही है। समाज में
परिवर्तन का प्रभाव कहीं न कहीं महिलाओं की भी जीवन शैली में अवश्य दिखाई पड़ता है, बावजूद
इसके इनमें धर्म के प्रति पूर्ण आस्था दिखाई पड़ती है।

Keywords


धर्म, अति मानवीय, अद्र्धांगिनी, परिवेश, विश्वास।

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DOI: https://doi.org/10.29320/jnpgvr.v10i01.11055

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