नये भारत का मार्ग कौशल विकास और रोजगार सृजन

हरनाम सिंह

Abstract


वैश्विक परिदृश्य में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चुनौती से निपटने में वे देश आगे हैं जिन्होंने कौशल
विकास का उच्च स्तर प्राप्त् किया है। रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए नए-नए उद्योग-धंधे
चाहिए, और उनमें काम करने के इच्छुक युवाओं में काम कर सकने की कुशलता चाहिए। भविष्य के
बाजारों के लिए कौशल विकास से लेकर मानव संसाधन विकसित करने के लिए घोषित प्रधानमंत्री
कौशल विकास योजना से भारतीय अर्थव्यवस्था आशान्वित है नए भारत कि संकल्पना को पूरा करने के
लिए। सरकार का लक्ष्य 2022 तक 15 करोड़ भारतीय युवाओं को काम का हुनर, कुशलता, दक्षता या
स्किल सिखाना है। परन्तु सभी नौकरी मांगेंगे, तो नौकरी देगा कौन? निश्चित रूप से कुछ लोगों को
तो आगे आना ही होगा कि हम बायो-डाटा देंगे नहीं, बल्कि लेंगे यानी उनको उद्यमी बनना पड़ेगा।
भारत को कौशल का वैश्विक केन्द्र बनाने और रोजगार की समस्या के समाधान के लिए ही कौशल
विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय स्थापित किया गया है। “कुशल भारत, कौशल भारत” की चुनौती को
स्वीकार कर ही विकसित भारत, नयें भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है।
आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए कौशल प्रशिक्षण और रोजगार सृजन प्रेरक होते है। प्रस्तुत
शोध पत्र में कौशल विकास की योजनाओं, सरकारी, निजी प्रयासों और चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत
करने का प्रयास किया गया है। जन सामान्य की सक्रिय भागीदारी स्थापित कर ही भारत का पुनर्निर्माण
किया जा सकता है।

Keywords


कौशल विकास, रोजगार सृजन, उष्मायन, जनसांख्यिकीय लाभांश, आर्थिक वृद्धि

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DOI: https://doi.org/10.29320/jnpgvr.v10i01.11060

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