स्टीरियो टाइप का प्रतिरोध रचती कहानियाँ

अरुण कुमार पाण्डेय

Abstract


नब्बे के दशक में कथाकारों की एक नई पीढ़ी अपनी कहानी-उपन्यासों के माध्यम से हमारे सामने
उपस्थित हुई। अपनी प्रथम उपस्थिति से ही इस पीढ़ी ने आलोचकों और वृहत्तर पाठक समाज को
आकर्षित कर कथा साहित्य के क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया। आख्यान के खास तरह के अंदाज और
अपनी बेबाकी के चलते इस पीढ़ी का लेखन हमेशा ही चर्चा में रहा। विषयगत विविधता और हर विषय
के साथ अलग तरह का ट्रीटमेंट इस पूरी पीढ़ी की विशेषता है। सुप्रसिद्ध कथाकार संतोष चैबे उस पीढ़ी
के महत्वपूर्ण लेखक हैं। इनकी कहानियां और उपन्यास भी हिंदी साहित्य जगत में अपनी बेबाक शैली
के लिए जाने जाते हैं। प्रस्तुत आलेख इनकी कहानियों पर केंद्रित है। संतोष चैबे की कहानियों में
स्त्री-पुरुष सम्बन्धों की गर्माहट है तो समाज में बदलाव लाने की एक आशान्वित पहल भी है। प्रथम
दृष्टया इनकी कहानियाँ इनकी नवाचारी प्रवृत्ति के चलते एक बेपरवाही का एहसास कराती हैं किन्तु
अपने विस्तार में वे किसी गंभीर संदेश तक पहुँचती हैं। संतोष चैबे की यह लेखकीय विशिष्टता,
आलोचक पुष्पपाल सिंह के इस कथन कि “अपने चतुर्दिक उपस्थित यथार्थ को कहानीकार किस रूप
में अपनी रचना में उपस्थित करता है, किस रूप में वह अपनी राजनीतिक, सामाजिक तथा सांस्कृतिक
स्थितियों को ग्रहण करता है, यही दृष्टिकोण उसकी कहानी का चरित्र बनाता है”। से काफी हद तक
स्पष्ट हो जाती है। संतोष चैबे का दृष्टिकोण स्पष्ट है, इनकी पक्षधरता निर्विवाद है। इनकी कहानियां
आज के भूमंडलीकृत, बाजारवादी समय में मनुष्यता और प्रेम को बचाने के लिए हर स्तर पर प्रयास
करती हैं। नब्बे के बाद का भारतीय समाज बाजार और उसकी नीतियों से संचालित होने वाला समाज
है। इस बदलाव ने देश के सामने कई चुनौतियां खड़ी की। बाजार की उदारवादी नीतियों से न केवल
देशों में उत्पादों की उपलब्धता सरल हुई बल्कि इस अभियान का सीधा असर बाजार देशों की
संस्कृतियों पर भी पड़ा। संतोष चैबे की कहानियां समय के इन बदलावों को एक तरफ चिन्हित करती
हैं तो दूसरी तरफ इनके प्रभाव को भी विश्लेषित करती चलती हैं। प्रस्तुत आलेख इनकी कहानियों की
इन विशेषताओं के साथ ही अनेक अन्य विशेषताओं का विश्लेषण करते हुए हिंदी कहानी जगत में इनका
महत्व स्पष्ट करता है।

Keywords


भूमंडलीकृत, बाजारवादी, अर्थव्यवस्था

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DOI: https://doi.org/10.29320/jnpgvr.v10i01.11063

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