नई कहानी का वैचारिक आधार और भीष्म साहनी की कहानियाँ

अरविन्द तिवारी

Abstract


कहानी साहित्य की सबसे लोकप्रिय विधा है। समाज में घटित हो रहे परिवर्तनों को पाठकों के समक्ष
रखने का ‘कहानी‘ सबसे लोकप्रिय माध्यम है। हिन्दी कहानी की विकास परंपरा में नयी कहानी सबसे
महत्वपूर्ण स्थान रखती है। नयी कहानी मूलत: मध्यवर्ग की कहानी है। मध्यवर्गीय समाज के अन्दर
की पीड़ा तथा घुटन को नयी कहानी हमारे समक्ष रखती है। नये कहानीकारों में भीष्म साहनी का विशेष
स्थान है। मध्यवर्गीय समाज की झूठी शान पर जैसा कटाक्ष भीष्म साहनी ने किया है वैसा अन्य किसी
कहानीकार ने नही। उनकी कहानियों में समाज का नग्न सच हमें दिखलाई पड़ता है। मध्यवर्गीय जीवन
में नये पारिवारिक रिश्तों के खत्म होते मूल्यों को वह प्रमुखता से अपनी कहानियों में उठाते है। भीष्म
साहनी की कहानियाँ मध्यवर्ग के खोखले समाज को उजागर करती है। निःसन्देह भीष्म साहनी अपनी
कहानियों के माध्यम से हिन्दी कहानी की विकास परंपरा में हमेशा प्रासंगिक बने रहेंगे।

Keywords


नयी कहानी, मध्यवर्ग, औद्यौगीकरण, आधुनिकीकरण,

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DOI: https://doi.org/10.29320/jnpgvr.v10i01.11064

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