सोशल मीडिया में भारतीय लोकवृत्त की चेतना

ऋतु राय

Abstract


समाज में किसी भी चेतना और उससे संबन्धित विचारधारा में परिवर्तन किसी न किसी परिवेश और
परिस्थिति के बदलाव की देने होती है। समाज में हो रहे परिवर्तन इसी का परिणाम होते हैं। यही
परिवर्तन समाज के दशा और दिशा तय करते हैं। किसी भी देश की चेतना और विचारधारा को
जानने- समझने के लिए उस देश के साहित्य का अवलोकन सर्वोत्तम माध्यम है। इसी साहित्य से
शुरु हुई लोकवृत्त चिंतन परंपरा, वैश्वीकरण और बाजरवाद के बाद तकनीकी माध्यम से विश्व भर की
विचारधाराओं को एक जगह समाहित करने में मदद कर रही है। हिन्दी साहित्य में वैश्वीकरण के प्रभाव
से लोकवृत्त चिंतन की विभिन्न विचारधाराओं का जन्म हुआ है। सांस्कृतिक आलोचना से शुरू हुई
लोकवृत्त राजनैतिक आलोचना का रूप धारण कर लेती है। लोकवृत्त को सार्वजनिक क्षेत्र के रूप में
भी जाना जाता है, जो की निजी क्षेत्रो में तर्कसंगत तरीके से सामान्य चिंतन वाले मुद्दों पर चर्चा करने
के लिए एकजुट हुये व्यक्तियों के बीच उन मुद्दों से निकली बहस है। इसे लोगों के बीच में लाने का
श्रेय जुर्गेन हेबरम्स को दिया गया। वैश्वीकरण के बाद हुये बदलावों से चिंतन परंपरा का स्वरूप बदला
और ये साहित्य से तकनीक के साथ जुड़ गया। वर्तमान में भारतीय लोकवृत्त की चेतना और सोशल
मीडिया में इसकी उपस्थिति का अध्ययन इस पत्र में किया गया है। सोशल मीडिया की वास्तविक
क्षमता और भारतीय नागरिक समाज किस तरह सार्वजनिक क्षेत्र का समर्थन करती है इस अध्ययन
के साथ ही एक लोकतांत्रिक समाज में सोशल मीडिया की भूमिका और सोशल मीडिया द्वारा लोकवृत्त
चेतना को उजागर करने का प्रयास किया गया है।

Keywords


सार्वजनिक क्षेत्र, लोकवृत्त, सोशल मीडिया, लोकतंत्र, सामाजिक मुद्दे, चिंतन

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DOI: https://doi.org/10.29320/jnpgvr.v10i01.11065

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