परिवर्तनशील सामाजिक परिस्थितिकी एवं भारतीय परिवार

रेनू गुप्ता, सुरेन्द्र कुमार जायसवाल

Abstract


व्यक्ति के जन्म के साथ ही उसका सम्बन्ध एक परिवार के साथ स्वतः ही जुड़ जाता है। भारतीय
सामाजिक संरचना में परिवार को एक महत्त्वपूर्ण संस्था के रूप मंे मान्यता मिली है। परिवर्तन शब्द कुछ
नवीन होने की बात पर बल देता है। सामाजिक संरचना में भी हमेशा परिवर्तन होता रहता है, जो आज
है वह कल अवश्य परिवर्तित होगा ऐसा माना जाता रहा है और यह सत्य भी है। पर्यावरण में भी परिवर्तन
को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इसी तरह सामाजिक परिस्थितिकी के अन्तर्गत भारतीय परिवारों
में भी परिवर्तन देखा जा सकता है, हम संयुक्त परिवार के बाद एकाकी परिवार एवं एकाकी परिवार के
पश्चात् अब सूक्ष्म एकाकी परिवार ने समाज में दस्तक दे दी है, जो संयुक्त परिवार व्यवस्था को पूरी तरह
से विघटित करने का प्रयास कर रहा है।

Keywords


परिवार, संस्कृति, सार्वभौमिकता, प्रगतिशील, संत्रास।

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DOI: https://doi.org/10.29320/vichar.11.2.2

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